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खुशियाँ
खुशियाँ आँखों ही आँखों में कुछ कहते जाना मौन रहे पर मुस्कुराते हुए आना दबे पाँव आना जीवन में मचलते हुए हंसतें जाना ...

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साजन साजन मैं पुकारु ,साजन है प्रदेश देख ! सखी द्वार पर आयो न कोई संदेश काक कहे प्रीत संदेश,हिवड़ो करे पुकार मन बैरी बेचैन...
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मधुर लय में बहता प्रीत के किस्से गुनगुनाता बरसी स्नेह की बदरी हुआ प्रीत में विभोर पल्ल्वित तन मन के तार प्रीत की हूक उठी ग...
हो खुद्दारी की चादर
ReplyDeleteमिले सुकून से दो वक़्त खाना
वो पल निगाहें तलाश रही जिंदगी में।...बहुत सुन्दर
हो खुद्दारी की चादर
ReplyDeleteमिले सुकून से दो वक़्त खाना
वो पल निगाहें तलाश रही जिंदगी में।...बहुत सुन्दर
वाह!
ReplyDeleteबहुत सुंदर लिखा कविता बिटिया
ReplyDeleteबहुत धन्यवाद आपका
ReplyDeleteबहुत धन्यवाद आपका
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना
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